Hindi love poetry : लो अब बहुत दूर हूँ तुमसे - Ranjan Kumar - Ranjan Kumar Dil ❤ Se - Poetry and Works of Ranjan Kumar

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Tuesday, February 12, 2019

Hindi love poetry : लो अब बहुत दूर हूँ तुमसे - Ranjan Kumar

alone


लो अब बहुत दूर हूँ तुमसे,
मुकम्मल  सफ़र भी हुआ चाहता है ,

वक़्त का काफिला
जो चला साथ दूर कबका हुआ !

यादों की झुरमुटों के बीच कभी
तेरी स्मृतियाँ ,
कौंध जाती हैं रह रह कर ,

"कौन समझेगा जिसे समझाऊंगा "
आज तेरी बात सही लगती है !

ये तन्हाई भी हमराह है
जब साथ नहीं तुम मेरे ,

सत्य के सूरज को
अपने दम तक न डूबने दूँगा !

बढाओ हाथ तुम अपना
और अब मुझको थाम लो तुम,

थक गया हूँ
दे देकर गवाही सत्य की ,

चाँद को छुप जाने दो फिर आ जाना
लहुलुहान असत्य से हूँ ,
और यह सफ़र पूरा हुआ !

लो अब बहुत दूर हूँ तुमसे
मुकम्मल  सफ़र भी हुआ चाहता है ,

वक़्त का काफिला
जो चला साथ , दूर कबका हुआ !

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