Hindi poetry : यही किस्मत है दीप की - Ranjan Kumar - Ranjan Kumar Dil ❤ Se - Poetry and Works of Ranjan Kumar

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Thursday, February 07, 2019

Hindi poetry : यही किस्मत है दीप की - Ranjan Kumar


जलता रहा मैं रात भर
चिराग बन बन के,अंधेरों में 
पल पल हरपल सहर होने तक 
बस तुझको राह दिखलाने के लिए !

अब जब सुबह की आभा 
फूट रही है देखो दूर वातायन में ..

बुझा ही तो दोगे तुम मुझे ,
चलो बुझा दो फिर रात तक के लिए ..!

सो जाने दो चिर निद्रा में मुझको ,
मगर फिर अंधियारा छाएगा जब 
मेरी जरूरत तब होगी तुमको ,
पुकारना , फिर लौटूंगा ,दीप हूँ मै !

एक दीप हूँ मै,इन अँधेरी रातों का 
यही किस्मत है दीप की,
अंधेरों में जिसकी कदर थी खूब 
दिन होते ही वह बुझा दिया जाता है !!

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