Hindi poetry : छोडो यार ये रोज रोज का ताना बाना - Ranjan Kumar - Ranjan Kumar Dil ❤ Se - Poetry and Works of Ranjan Kumar

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Wednesday, February 06, 2019

Hindi poetry : छोडो यार ये रोज रोज का ताना बाना - Ranjan Kumar



तुझे नंगा सच पसंद नहीं ,
और मुझे ...

रेशमी जुमलों में लिपटा झूठ !

छोडो यार 
ये रोज रोज का ताना बाना ,

इस दोस्ती की बुनियाद
बहुत जर्जर है ,

अब विपरीत दिशा में
अपनी मंजिलें तलाशते हैं ,

साझे का महल
सुकून नहीं दे सकता !!

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