Hindi poetry : यादों की जलती लालटेने बुझा दें अब - Ranjan Kumar - Ranjan Kumar Dil ❤ Se - Poetry and Works of Ranjan Kumar

Breaking

Friday, March 01, 2019

Hindi poetry : यादों की जलती लालटेने बुझा दें अब - Ranjan Kumar


lantern-memories


चांद उफक में डूब चुका है,

आ जाओ 

यादों की जलती लालटेंने 

बुझा दे हम !


रातरानी का शुक्रिया कर 
सो जायें ,

यादों को सुबह तक ,

महमहाती रखेंगी ये ...


नींद को

सिरहाने बुलाते हैं अब ,

यादों की कुनमुनाती पोटली 

पायताने रख देते हैं 

संभाल के ,


चाँद भी उफक में 

डूब चुका है ,

आ जाओ,यादों की जलती 

लालटेने बुझा दें अब !!



No comments:

Post a Comment