Hindi poetry : कहाँ है मेरे हिस्से का सूरज - Ranjan Kumar - Ranjan Kumar Dil ❤ Se - Poetry and Works of Ranjan Kumar

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Sunday, March 03, 2019

Hindi poetry : कहाँ है मेरे हिस्से का सूरज - Ranjan Kumar


sun


मेरे हिस्से में भी तो था 

एक सूरज !

जो डूब गया असमय 
जिसे डुबो दिया शातिरों ने,


मैं ढूंढ रहा हूँ उसे 
इस घने अँधेरे में ..


हाथ में जलती चैली लिए ,

जिसे श्मशान की  
जलती चिता से उठाया है मैंने !


अब या तो मेरा सूरज 
मुझे वापस मिलेगा ,


या चिता कि जलती इसी चैली से
फूँक दूंगा मैं ..


उन सब रावणों की लंका..

जिनके स्वर्ण महलों में 
मेरा सूरज कैद है !


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