Hindi poem : एक कश्ती हूँ मैं - Ranjan Kumar - Ranjan Kumar Dil ❤ Se - Poetry and Works of Ranjan Kumar

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Sunday, March 24, 2019

Hindi poem : एक कश्ती हूँ मैं - Ranjan Kumar

kashti


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दरिया मे तैरती डूबती 
उतराती सी 
एक कश्ती हूँ मैं ,
लहरों के थपेड़ों से 
डरकर नहीं पूछती 
अंजाम कभी !!

इसे मेरा हौसला 
कहती है ये 
बहती हुई नदी अक्सर ,
और किनारों को 
लगता है लहरो के संग 
दुस्साहस है !!

मुझे सफर की 
ललक है और 
सफर जारी है अनवरत ,
जब रुकेंगे तो 

होगा हिसाब 
कितनी दूर चली आई थी !!

- रंजन कुमार

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