Hindi Love poem : प्रेम-उपहार प्रियतम - Ranjan kumar - Ranjan Kumar Dil ❤ Se - Poetry and Works of Ranjan Kumar

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Friday, January 25, 2019

Hindi Love poem : प्रेम-उपहार प्रियतम - Ranjan kumar

इन कुहासों में लिपटी ,
सुबह को देखो तो जरा ..

मौसम बड़ा खुशनुमा है,
पलकें तो खोलो ..

कुछ कुहासे की बूंदें लाया हूँ मैं ..
तुम्हारे लिए ,

ठंढे थे .. पर मेरे प्रेम ने
गर्म कर दिया इन्हें ..

लो इम्हें अब 
तुम्हारी गालों पर छुआ दूँ ..

पलकों के अंजुमन में 
सजा दूँ इन्हें ,

एक उपहार मेरा
प्रेम-उपहार प्रियतम ....!!

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