जो आँधियों ने तिनका - तिनका घोसला बनाये रक्खा है - Ranjan Kumar Dil ❤ Se - Poetry and Works of Ranjan Kumar

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Wednesday, November 28, 2018

जो आँधियों ने तिनका - तिनका घोसला बनाये रक्खा है

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चराग उनका अक्सर
बारिशों से बचाये रक्खा है ,

 जिनने हमसे सिर्फ एक
कारोबारी रिश्ता रक्खा है !


समझतें हों समझने वाले
आँसुओं की कीमत लाख सही ,

अपना भी एक दायरा है,
उदासियों को समझा रक्खा है!


वैसे तो जुदाइयों का समंदर पार
करके आते रहे आने वाले ,

बेवजह तो नहीं खुदा ने पत्तों
को हरा, कुछ को पीला रक्खा है !


करिश्में हैं, सजा है , या
शायद तन्हाइयों का दौर है ,

कोई तो वजह है, जो तकदीर
ने यूँ अकेला रक्खा है !


खुदाया - तहरीर है तेरी ,
क्या कुछ उम्मीद लिखी हुई?

जो आँधियों ने तिनका - तिनका
घोसला बनाये रक्खा है !! 


- Vvk

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