Hindi poetry : गुनाहों की उनके फेहरिस्त - Ranjan Kumar - Ranjan Kumar Dil ❤ Se - Poetry and Works of Ranjan Kumar

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Thursday, February 28, 2019

Hindi poetry : गुनाहों की उनके फेहरिस्त - Ranjan Kumar



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एक तो गुनाहों की उनके 
फेहरिस्त 
पहले ही बहुत लम्बी है ,

हर रोज जान बूझकर 
नए गुनाह वह 
अब भी किये जाते हैं !


इल्म नहीं यह क्यों आखिर
जिस दिन क़यामत बरपेगी
कौन उन्हें बचाएगा ?


घड़ा पापों का जब फूटेगा
किसको आवाज लगायेंगे
कश्ती  कौन पार लगाएगा ?


- रंजन कुमार 

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