चेहरे - परत दर परत .. उघड़ते हुये चेहरे ! - Ranjan Kumar Dil ❤ Se - Poetry and Works of Ranjan Kumar

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Sunday, December 02, 2018

चेहरे - परत दर परत .. उघड़ते हुये चेहरे !

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चेहरे 
परत दर परत,
उघड़ते हुये चेहरे !

सौम्य मुखौटे लगाये,
अपना सच छिपाते 
बनावटी चेहरे !
याद रखना 
हरएक चेहरे के पीछे
छिपे हैं अनेक चेहरे !

किसको समझोगे ,
किस किसको जानोगे ,
एक चेहरे के साथ हैं 
अनगिनत चेहरे !

असली कौन मालूम नहीं ,
क्या पता कब दिख जाये
चेहरों के बीच फिर चेहरे !!

- रंजन कुमार 

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