लोग मिलते रहें , बिछड़तें रहें .. सफर आखिर लिखा तन्हा था , चलता रहा ! - Ranjan Kumar Dil ❤ Se - Poetry and Works of Ranjan Kumar

Breaking

Friday, November 23, 2018

लोग मिलते रहें , बिछड़तें रहें .. सफर आखिर लिखा तन्हा था , चलता रहा !


alone-boy-wallpaper


मुसलसल हादसों का सिलसिला .. चलता रहा , 
बारिश होती रही,शाख से पत्ता-पत्ता टूटता रहा !
.
लोग कुछ जों बैठें थे .. रौशिनी की फ़िराक में ,
सूरज को भी फर्क किआ, आखिर डूबता रहा !
.
समंदर के किनारे बनते घरौंदें..बहा ले गयी लेहर ,
तब भी कोई ज़द पर फिर-फिर घरौंदें बनाता रहा !
.
भीड़ का किआ है , मिलतें हैं - बिछड़ जातें हैं , 
सफर आखिर .. लिखा तन्हा था , चलता रहा !


- Vvk

No comments:

Post a Comment