राम को वनवास दे ही दिया जब मरो पुत्र वियोग में , रोवो तड़पो चीत्कार करो ! - Ranjan Kumar Dil ❤ Se - Poetry and Works of Ranjan Kumar

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Thursday, November 22, 2018

राम को वनवास दे ही दिया जब मरो पुत्र वियोग में , रोवो तड़पो चीत्कार करो !

मेरे प्रकाशित काव्य संकलन अनुगूँज पुस्तक मे संकलित प्रस्तुत है ये रचना ..

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राम को वनवा
दे ही दिया जब
तो नियति है फिर 
यही दशरथ की 
मरो पुत्र वियोग में
रोवो तड़पो चीत्कार करो!
.
सुकून की साँस 
मिल नहीं सकती 
फिर दशरथ को 
कभी - नहीं ,
.किसी भी तरह से नहीं 
जो राम जैसे पुत्र को
वन भेज दे ..!
.
भरत को राज्य और
राम को वनवास ,
ये निर्णय है दशरथ का
तो भरत के साथ
.भरत के राज्य में ,
सुकून की एक भी साँस
नहीं लिखी फिर ..
विधाता ने दशरथ के लिए !
.
भरत राम की जगह
राजा हो सकता है
वह राम सा सुकून 

नहीं दे सकता,
पुत्र की मर्यादा ,
राम रखेगा तो भी
पिता की मर्यादा को
.तोड़ने के दंड के 

भागी तो हैं ही
अब दशरथ फिर, 
और कर्म किसी को भी
.फिर कहाँ छोड़ता है ?

राम को वनवास 
दे ही दिया जब
तो नियति है फिर
यही दशरथ की
मरो पुत्र वियोग में ,

रोवो तड़पो चीत्कार करो !!


- रंजन कुमार

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